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Marketing Fraud: 3 धोखेबाजों ने किया लाखों का फ्रॉड, 2 गिरफ्तार, पुलिस ने किया गिरोह का पर्दाफाश।

Marketing Fraud: 3 धोखेबाजों ने किया लाखों का फ्रॉड, 2 गिरफ्तार, पुलिस ने किया गिरोह का पर्दाफाश।

Marketing Fraud: दिल्ली पुलिस ने एक बड़े मार्केटिंग फ्रॉड का पर्दाफाश किया है। एक रिटेल कंपनी को लाखों का नुकसान पहुंचाने वाले गिरोह के 2 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि तीसरे की तलाश जारी है। ये आरोपी फर्जी कर्मचारी बनकर और जाली दस्तावेज दिखाकर कंपनियों से माल मंगवाते थे और फिर पैसे दिए बिना गायब हो जाते थे। पुलिस ने इस मामले में शिकायत मिलने के बाद तेजी से काम किया और टेक्निकल सर्विलांस की मदद से आरोपियों को ओडिशा के भुवनेश्वर में ट्रैक कर लिया। पीड़ित के वकील राकेश बेशला ने पुलिस की तारीफ करते हुए कहा कि इस गिरफ्तारी से कई और लोग इस गिरोह का शिकार होने से बच गए। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।

Marketing Fraud: 3 धोखेबाजों ने किया लाखों का फ्रॉड, 2 गिरफ्तार, पुलिस ने किया गिरोह का पर्दाफाश।

Corporate Fraud: दिल्ली में लाखों की ठगी, मार्केटिंग कंपनी के फर्जी कर्मचारी बन 2 शातिर ठग ओडिशा से गिरफ्तार

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में धोखेबाजों और ठगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे अब कॉर्पोरेट जगत में भी सेंध लगाने लगे हैं। एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली से सामने आया है, जहां खुद को एक बड़ी मार्केटिंग कंपनी का कर्मचारी बताकर जालसाजों के एक गिरोह ने एक रिटेल कंपनी को लाखों रुपये का चूना लगा दिया। लेकिन दिल्ली पुलिस की सतर्कता और तेज कार्रवाई के चलते इस गिरोह के दो सदस्यों को ओडिशा से धर दबोचा गया है।

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Marketing Fraud: दिल्ली में कॉर्पोरेट ठगी का नया तरीका

यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। कुछ शातिर दिमाग लोग एक बड़ी मार्केटिंग कंपनी के कर्मचारी बनकर बाजार में उतरते हैं। वे फर्जी पहचान पत्र, फर्जी दस्तावेज और पूरी तरह से प्रोफेशनल अंदाज में बात करते हैं, ताकि किसी को उन पर शक न हो। इसी का फायदा उठाकर उन्होंने नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली की एक बड़ी रिटेल कंपनी को अपना निशाना बनाया।

कैसे दिया गया इस बड़ी ठगी को अंजाम?

आरोपियों ने सबसे पहले एक प्रतिष्ठित रिटेल कंपनी से संपर्क साधा। उन्होंने खुद को एक बड़ी मार्केटिंग कंपनी का एम्प्लॉय बताया और अपनी कंपनी के लिए बड़ी मात्रा में माल खरीदने की बात की। उन्होंने कंपनी को विश्वास दिलाने के लिए फर्जी दस्तावेज भी पेश किए। उनके प्रोफेशनल व्यवहार और बड़ी कंपनी का नाम सुनकर रिटेल कंपनी उनके झांसे में आ गई और उन्हें लाखों रुपये का माल क्रेडिट पर दे दिया।

माल मिलते ही बंद कर लिए फोन, हुए रफूचक्कर

डील पक्की होने के बाद, रिटेल कंपनी ने लाखों का माल आरोपियों द्वारा बताए गए पते पर पहुंचा दिया। कुछ दिनों तक सब कुछ ठीक रहा, लेकिन जब पेमेंट की बारी आई और कंपनी ने आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की, तो उनके होश उड़ गए। आरोपियों ने अपने सारे फोन नंबर बंद कर लिए थे और जिस पते पर माल भेजा गया था, वह भी फर्जी निकला। तब जाकर कंपनी को एहसास हुआ कि वे एक बड़े फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं।

पुलिस तक पहुंचा मामला, शुरू हुई जांच

जब कंपनी को यकीन हो गया कि उनके साथ लाखों की धोखाधड़ी हुई है, तो उन्होंने बिना देर किए इस मामले की शिकायत नॉर्थ-वेस्ट जिले की पुलिस को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज की और जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया। पुलिस के लिए यह मामला एक चुनौती था क्योंकि आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए हर संभव प्रयास किया था।

Marketing Fraud: 3 धोखेबाजों ने किया लाखों का फ्रॉड, 2 गिरफ्तार, पुलिस ने किया गिरोह का पर्दाफाश।

दिल्ली से ओडिशा: पुलिस ने कैसे बिछाया जाल?

पुलिस टीम ने अपनी जांच शुरू की और सबसे पहले उन दस्तावेजों की जांच की जो आरोपियों ने जमा कराए थे। जैसा कि शक था, सारे दस्तावेज फर्जी निकले। इसके बाद पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस का सहारा लिया। आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल और लोकेशन को खंगाला गया। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस को एक सुराग मिला, जो उन्हें दिल्ली से हजारों किलोमीटर दूर ओडिशा के भुवनेश्वर तक ले गया।

भुवनेश्वर में बड़ी कार्रवाई, 2 आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की एक टीम तुरंत भुवनेश्वर के लिए रवाना हुई। वहां पहुंचकर टीम ने स्थानीय पुलिस की मदद से जाल बिछाया और दो मुख्य आरोपियों, वासुदेव स्वेन और दीपक कुमार को धर दबोचा। दिल्ली पुलिस की इस अंतरराज्यीय कार्रवाई से अपराधी भी हैरान रह गए। दोनों को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया है।

वकील ने जताई ‘बड़ी मछली’ के होने की आशंका

इस मामले में पीड़ित पक्ष की पैरवी कर रहे वकील राकेश बेशला ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा, “पुलिस ने जिस तेजी और प्रोफेशनलिज्म से काम किया है, वह काबिले तारीफ है। इस गिरफ्तारी से कई और कंपनियां इस गिरोह का शिकार होने से बच गई हैं।” उन्होंने आगे कहा, “यह गिरोह जिस संगठित तरीके से काम कर रहा था, उससे साफ लगता है कि इनके पीछे किसी बड़ी मछली का हाथ हो सकता है। हमें उम्मीद है कि पुलिस की जांच में इसका भी खुलासा होगा।”

कौन हैं ये शातिर ठग?

पुलिस की शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि वासुदेव और दीपक, दोनों ही शातिर अपराधी हैं और उनका मकसद फर्जीवाड़ा करके जल्दी से जल्दी अमीर बनना था। वे दिल्ली-एनसीआर में इसी तरह से कई और कंपनियों को भी निशाना बनाने की फिराक में थे। पुलिस अब उनसे यह जानने की कोशिश कर रही है कि वे अब तक कितनी कंपनियों के साथ ऐसी ठगी कर चुके हैं।

तीसरे आरोपी अमित सिंह की तलाश जारी

इस गिरोह में एक तीसरा सदस्य भी शामिल है, जिसकी पहचान अमित सिंह के रूप में हुई है। अमित सिंह फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जोर-शोर से जुटी हुई है। पुलिस को उम्मीद है कि अमित सिंह की गिरफ्तारी के बाद इस गिरोह के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो जाएगा।

कंपनियों के लिए एक बड़ी सीख

यह घटना दिल्ली-एनसीआर की तमाम कंपनियों के लिए एक सबक है। पुलिस ने कंपनियों से अपील की है कि वे किसी भी नई पार्टी के साथ व्यापार करने से पहले उसकी पूरी तरह से जांच-पड़ताल कर लें। किसी भी तरह के संदेह होने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके। फिलहाल, दिल्ली पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से गहनता से पूछताछ कर रही है और इस मामले की हर परत को खोलने में जुटी है।

मुख्य बिंदुविवरण
घटना का प्रकारकॉर्पोरेट धोखाधड़ी / ठगी।
तरीकाखुद को बड़ी मार्केटिंग कंपनी का कर्मचारी बताकर और फर्जी दस्तावेज दिखाकर लाखों का माल खरीदना और भुगतान न करना।
पीड़ितनॉर्थ-वेस्ट दिल्ली की एक रिटेल कंपनी।
आरोपी गिरफ्तार1. वासुदेव स्वेन, 2. दीपक कुमार।
फरार आरोपीअमित सिंह।
गिरफ्तारी का स्थानभुवनेश्वर, ओडिशा।
पुलिस की कार्रवाईटेक्निकल सर्विलांस और अंतरराज्यीय ऑपरेशन के माध्यम से गिरफ्तारी।
वकील का बयानपुलिस की तारीफ; गिरोह के संगठित होने और किसी ‘बड़ी मछली’ के शामिल होने की आशंका जताई।
वर्तमान स्थितिगिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है; फरार आरोपी अमित सिंह की तलाश की जा रही है।

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