दिल्ली INSTAGRAM आईफोन स्कैम का पर्दाफाश। साइबर पुलिस ने सस्ते आईफोन के नाम पर ₹9 लाख ठगने वाले 19 वर्षीय मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है।

INSTAGRAM पर ‘सस्ते आईफोन’ का जानलेवा लालच
आज के डिजिटल युग में, सोशल मीडिया पर दिखने वाले आकर्षक ऑफर्स अक्सर एक बड़े धोखे का मुखौटा होते हैं। ऐसा ही एक मामला दिल्ली में सामने आया है, जहां आउटर-नॉर्थ जिले की साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़े ‘इंस्टाग्राम आईफोन स्कैम’ का भंडाफोड़ किया है।
पुलिस ने हरियाणा के हिसार से इस गिरोह के 19 वर्षीय मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है, जो ‘delhi_apple_store0’ नामक एक फर्जी इंस्टाग्राम पेज के जरिए लोगों को सस्ते आईफोन का झांसा देकर लाखों की ठगी कर रहा था। अब तक की जांच में लगभग 8-9 लाख रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है और 8 से ज्यादा पीड़ितों की पहचान की जा चुकी है। यह मामला ऑनलाइन शॉपिंग के खतरों और साइबर अपराधियों के नए-नए पैंतरों को उजागर करता है।
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क्या है ‘delhi_apple_store0’ की कहानी? एक पीड़ित की आपबीती
इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब एक पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर अपनी आपबीती दर्ज कराई। पीड़ित ने अपनी शिकायत में बताया कि वह इंस्टाग्राम पर ‘delhi_apple_store0’ नामक एक चैनल के संपर्क में आया, जहां बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर लेटेस्ट आईफोन बेचने का दावा किया जा रहा था। पेज पर पोस्ट की गई फर्जी रसीदों और ग्राहकों के झूठे पॉजिटिव फीडबैक को देखकर पीड़ित को लगा कि यह एक असली सौदा है। उसने मैसेंजर के जरिए पेज के संचालकों से संपर्क किया।

ठगों ने उसका विश्वास जीतने के लिए iPhone 16 Pro की बुकिंग के लिए मात्र ₹100 का टोकन अमाउंट मांगा। इसके बाद शुरू हुआ असली खेल। पीड़ित से वारंटी, बॉर्डर टैक्स, शिपिंग चार्ज, मेल वेरिफिकेशन और सिम एक्टिवेशन जैसे अनगिनत झूठे बहानों से पैसे मांगे गए। उन पर विश्वास करके, पीड़ित ने कुल 29 यूपीआई ट्रांजैक्शन के जरिए ₹65,782 का भुगतान कर दिया। पैसे मिलने के बाद, ठगों ने जवाब देना बंद कर दिया और कोई भी फोन डिलीवर नहीं किया।
कैसे खुला 9 लाख के फ्रॉड का राज?
ऑनलाइन शिकायत (पावती संख्या 30809250076921) मिलते ही, आउटर-नॉर्थ जिले की साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की टीम तुरंत एक्शन में आ गई। डीसीपी हरेश्वर स्वामी (आईपीएस) के पर्यवेक्षण और एसीपी दिनेश कुमार के मार्गदर्शन में, एसएचओ गोविंद सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया।
पुलिस ने तुरंत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत FIR संख्या 58/2025 दर्ज की और जांच शुरू कर दी। यह मामला साइबर पुलिस के लिए एक चुनौती थी क्योंकि अपराधी डिजिटल दुनिया की आड़ में छिपे हुए थे। टीम ने इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा और अपराधियों को जल्द से जल्द पकड़ने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
एक मोबाइल नंबर से मास्टरमाइंड तक
पुलिस टीम ने अपनी जांच की शुरुआत तकनीकी विश्लेषण से की। सबसे पहले, फर्जी इंस्टाग्राम आईडी ‘delhi_apple_store0’ की जांच की गई। जांच में पता चला कि यह आईडी एक मोबाइल नंबर 9653583656 का उपयोग करके बनाई गई थी। जब इस नंबर की डिटेल्स निकाली गईं, तो यह हरियाणा के हिसार जिले के कलिरावन गांव के रहने वाले अमन, पुत्र बलवंत के नाम पर पंजीकृत पाया गया। यह पुलिस के लिए एक बड़ी लीड थी। इस जानकारी के आधार पर, एसआई अमित, हेड कांस्टेबल राहुल निगम, अनिल कुमार, जगजीत और रमन की एक समर्पित टीम का गठन किया गया और उसे आरोपी को पकड़ने का काम सौंपा गया।
ठगों का गांव’ कलिरावन में आधी रात की रेड
तकनीकी निगरानी और जमीनी खुफिया जानकारी से यह पुष्टि हो गई कि आरोपी अमन अपने गांव कलिरावन में ही मौजूद है। यह गांव साइबर धोखाधड़ी की गतिविधियों के लिए पहले से ही बदनाम रहा है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘ठगों का गांव’ भी कहा जाता है। जानकारी पुख्ता होते ही, पुलिस टीम ने एक साहसिक कदम उठाते हुए आधी रात को गांव में छापेमारी करने का फैसला किया।
टीम ने गांव के खेतों और कई घरों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। आरोपियों ने पुलिस से बचने की पूरी कोशिश की, लेकिन टीम के अथक प्रयासों और दृढ़ संकल्प के आगे उनकी एक न चली। आखिरकार, 23 अक्टूबर 2025 को 19 वर्षीय अमन को सफलतापूर्वक दबोच लिया गया।
कौन है 19 साल का मास्टरमाइंड अमन?
पुलिस की गिरफ्त में आया 19 वर्षीय अमन सिर्फ 12वीं पास है। पूछताछ में उसने बताया कि उसके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। इसी दौरान वह अपने गांव के कुछ स्थानीय साइबर अपराधियों के संपर्क में आया, जिन्होंने उसे ऑनलाइन धोखाधड़ी के जरिए जल्दी पैसा कमाने का लालच दिया। धीरे-धीरे, उसने फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाने, लोगों को लुभाने और डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म में हेरफेर करने की तकनीकें सीख लीं। उसने कबूल किया कि वह पिछले कुछ समय से इस तरह की धोखाधड़ी में सक्रिय था और अपनी गिरफ्तारी तक देश के विभिन्न हिस्सों से निर्दोष लोगों से लगभग 8-9 लाख रुपये ठग चुका था।

क्या था ठगी का तरीका (Modus Operandi)?
आरोपी अमन और उसके साथियों का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। वे सबसे पहले इंस्टाग्राम पर एप्पल उत्पादों के अधिकृत पुनर्विक्रेताओं के रूप में फर्जी पेज बनाते थे। वे भारी छूट और आकर्षक ऑफर्स का विज्ञापन देकर पीड़ितों को आकर्षित करते थे। विश्वास जीतने के लिए, वे नकली ग्राहक चैट, बिल और डिलीवरी की तस्वीरें पोस्ट करते थे। एक बार जब कोई पीड़ित उनसे संपर्क करता, तो उसे बुकिंग के लिए एक छोटी राशि (जैसे ₹100) का भुगतान करने के लिए कहा जाता था, ताकि विश्वास बन सके।
इसके बाद, वारंटी, कस्टम शुल्क, शिपिंग और वेरिफिकेशन जैसे कई झूठे शुल्क बताकर उनसे लगातार पैसे मांगे जाते थे। यह पैसा अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराया जाता था ताकि मनी ट्रेल को छिपाया जा सके। उनका मुख्य निशाना युवा ग्राहक होते थे जो सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं और सस्ते गैजेट सौदों की तलाश में रहते हैं।
शक की सुई 5 और लोगों पर
अमन की गिरफ्तारी इस गिरोह के अंत की सिर्फ शुरुआत है। पुलिस को शक है कि यह एक बड़ा नेटवर्क है। अमन से पूछताछ के आधार पर, पुलिस अब इस साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क में शामिल होने के संदेह में पांच और सह-आरोपियों- शाकिर, आमिर खान, गोदू, जगदीश उर्फ जोंटी, और गुलशन की तलाश कर रही है। पुलिस का अनुमान है कि ठगी गई कुल राशि और पीड़ितों की संख्या और भी बढ़ सकती है। पुलिस अब इन सभी के बैंक खातों और यूपीआई आईडी की जांच कर रही है ताकि पैसे के प्रवाह को समझा जा सके और सभी अपराधियों को पकड़ा जा सके।
बरामदगी और डिजिटल सबूत
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी अमन के कब्जे से दो मोबाइल फोन और तीन डेबिट कार्ड बरामद किए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बरामदगी डिजिटल सबूतों की है, जिसमें फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट के चैट और लेनदेन के विवरण शामिल हैं। ये सबूत अदालत में आरोपियों के खिलाफ एक मजबूत मामला बनाने में मदद करेंगे। पुलिस जब्त किए गए उपकरणों का फोरेंसिक विश्लेषण भी कर रही है ताकि और अधिक पीड़ितों की पहचान की जा सके और नेटवर्क के बारे में अधिक जानकारी जुटाई जा सके। अब तक इस मामले से संबंधित 8 एनसीआरपी शिकायतों को जोड़ा जा चुका है।
दिल्ली पुलिस की अपील और आपके लिए सबक
आउटर-नॉर्थ जिले की साइबर पुलिस की यह सफलता दिखाती है कि डिजिटल दुनिया में अपराधी कितने भी शातिर क्यों न हों, वे कानून के हाथों से बच नहीं सकते। दिल्ली पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे महंगे गैजेट्स ऑनलाइन खरीदते समय बेहद सतर्क रहें। किसी भी सोशल मीडिया अकाउंट पर भुगतान करने से पहले उसकी प्रामाणिकता को अच्छी तरह से सत्यापित करें। यदि कोई सौदा सच होने के लिए बहुत अच्छा लग रहा है, तो शायद वह सच नहीं है। किसी भी साइबर धोखाधड़ी की सूचना तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर या www.cybercrime.gov.in पर दें। आपकी एक छोटी सी सावधानी आपको बड़ी धोखाधड़ी से बचा सकती है।
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| मामले का नाम | इंस्टाग्राम आईफोन सेलिंग स्कैम |
| पुलिस स्टेशन | साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, आउटर-नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट, दिल्ली |
| प्रेस विज्ञप्ति दिनांक | 26.10.2025 |
| घटना का प्रकार | इंस्टाग्राम पर सस्ते आईफोन बेचने के बहाने ऑनलाइन धोखाधड़ी। |
| फर्जी इंस्टाग्राम पेज | “delhi_apple_store0” |
| कुल धोखाधड़ी | लगभग ₹8-9 लाख |
| पीड़ितों की संख्या | 8 से अधिक शिकायतें जुड़ीं |
| मुख्य आरोपी | अमन (19 वर्ष): निवासी कलिरावन, हिसार (हरियाणा), 12वीं पास। |
| गिरफ्तारी की तिथि | 23 अक्टूबर 2025 |
| अन्य संदिग्ध | शाकिर, आमिर खान, गोदू, जगदीश @ जोंटी, और गुलशन (फरार)। |
| धोखाधड़ी का तरीका | – भारी छूट वाले फर्जी इंस्टाग्राम पेज बनाना। – नकली ग्राहक चैट और रसीदें पोस्ट कर विश्वास जीतना। – ₹100 जैसी छोटी बुकिंग राशि से शुरुआत करना। – वारंटी, बॉर्डर टैक्स, शिपिंग आदि के नाम पर कई बार भुगतान कराना। – पैसे को कई खातों में घुमाकर मनी ट्रेल छिपाना। |
| बरामदगी | – 02 मोबाइल फोन। – 03 डेबिट कार्ड। – इंस्टाग्राम चैट और लेनदेन के डिजिटल सबूत। |
| पुलिस टीम | SHO इंस्पेक्टर गोविंद सिंह के नेतृत्व में, ACP दिनेश कुमार और DCP हरेश्वर स्वामी के पर्यवेक्षण में। |
| FIR संख्या | 58/2025, धारा 318(4) BNS, साइबर पुलिस स्टेशन, आउटर-नॉर्थ। |