Subhash Place Fraud Case में दिल्ली पुलिस ने ठगी गिरोह का भंडाफोड़ कर 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया। संपत्ति और एडमिशन के नाम पर लाखों की ठगी का खुलासा।

Subhash Place Fraud Case में दिल्ली पुलिस की उत्तर-पश्चिम जिला टीम को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। थाना सुभाष प्लेस पुलिस ने संपत्ति के सौदे और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश दिलाने के नाम पर लोगों से भारी धनराशि ठगने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में दो प्रमुख आरोपियों—कुमार गौरव उर्फ राहुल और प्रणव शर्मा—को गिरफ्तार किया गया है।
Subhash Place Fraud Case: पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी बेहद योजनाबद्ध तरीके से लोगों को झूठे आश्वासन देकर बैंक ट्रांसफर और नकद के माध्यम से रकम वसूलते थे। इसके बाद धन को कई बैंक खातों में घुमाकर स्रोत छिपाने की कोशिश की जाती थी। कार्रवाई के दौरान महिंद्रा स्कॉर्पियो कार, मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज, लेन-देन रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य सहित कई महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की गई।
Subhash Place Fraud Case: एफआईआर संख्या 674/25 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच जारी है। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य सहयोगियों की पहचान भी जल्द की जाएगी।
Subhash Place Fraud Case: कैसे हुआ ठगी गिरोह का पर्दाफाश
Subhash Place Fraud Case की शुरुआत एक शिकायत से हुई, जिसमें रोहिणी निवासी 28 वर्षीय युवक दीपु कुमार ने आरोप लगाया कि उसे संपत्ति का सौदा कराने और प्रतिष्ठित कॉलेज में प्रवेश दिलाने का भरोसा देकर बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई गई। रकम लेने के बाद आरोपियों ने संपर्क बंद कर दिया।
शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और तकनीकी व वित्तीय जांच शुरू की।
जांच के प्रमुख चरण:
- मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण
- बैंक खातों की ट्रेल जांच
- डिजिटल साक्ष्यों का सत्यापन
- संदिग्ध लेन-देन की निगरानी
इन सभी प्रक्रियाओं से स्पष्ट हुआ कि यह कोई साधारण धोखाधड़ी नहीं बल्कि एक सुव्यवस्थित नेटवर्क था।
जांच के दौरान कई अन्य पीड़ित सामने आए, जिन्होंने बताया कि उनसे भी बच्चों का एडमिशन कराने के नाम पर पैसे लिए गए थे। इससे पुलिस को अंदाजा हुआ कि गिरोह लंबे समय से सक्रिय था।
विशेष टीम गठित कर आरोपियों के ठिकानों पर निगरानी रखी गई और ठोस सबूत मिलने के बाद उन्हें विधिसम्मत तरीके से गिरफ्तार कर लिया गया।
यह ऑपरेशन दर्शाता है कि साइबर और वित्तीय अपराधों से निपटने में अब पुलिस तकनीकी साधनों का अधिक प्रभावी उपयोग कर रही है।
Subhash Place Fraud Case: आरोपियों की कार्यप्रणाली ने चौंकाया
Subhash Place Fraud Case की जांच में जो कार्यप्रणाली सामने आई, वह बेहद सुनियोजित और पेशेवर अपराध की ओर इशारा करती है।
मुख्य आरोपी कुमार गौरव उर्फ राहुल पीड़ितों से संपर्क कर उन्हें आकर्षक प्रस्ताव देता था, जैसे:
- कम कीमत पर संपत्ति दिलाना
- प्रतिष्ठित संस्थानों में एडमिशन
- तेजी से डील फाइनल कराने का दावा
विश्वास जीतने के बाद वह पीड़ितों से बैंक ट्रांसफर करवाता था। कई मामलों में नकद भी लिया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ठगी की रकम सीधे एक खाते में नहीं जाती थी।
👉 रकम को कई खातों में ट्रांसफर कर:
- स्रोत छिपाया जाता था
- जांच को भ्रमित किया जाता था
- धन को जल्दी निकाला जाता था
पूछताछ में सामने आया कि सह-आरोपी प्रणव शर्मा अपने नियंत्रण वाले खातों का उपयोग करवाता था। पैसे जमा होने के बाद वह राशि निकालकर मुख्य आरोपी को सौंप देता था।
पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क संभवतः अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय था और इसमें अन्य सहयोगी भी शामिल हो सकते हैं।
इस खुलासे के बाद मामले में BNS की धारा 112 भी जोड़ी गई है।
पुलिस की कार्रवाई, तकनीकी जांच और गिरफ्तारी ऑपरेशन
इस पूरे ऑपरेशन में समन्वित टीमवर्क की अहम भूमिका रही। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में गठित टीम में उपनिरीक्षक नीरज कुमार, सहायक उपनिरीक्षक जयपाल, मुख्य आरक्षी नवीन और अन्य स्टाफ शामिल थे।
टीम ने कई स्तरों पर काम किया:
✔ तकनीकी निगरानी
फोन रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रैकिंग से आरोपियों की लोकेशन का पता लगाया गया।
✔ बैंक ट्रेल एनालिसिस
संदिग्ध खातों की पहचान कर लेन-देन का पूरा नेटवर्क समझा गया।
✔ अंतरराज्यीय समन्वय
मुख्य आरोपी को मुंबई से गिरफ्तार किया गया।
✔ डिजिटल साक्ष्य संग्रह
मोबाइल डेटा, फर्म दस्तावेज और ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड जब्त किए गए।
बरामद सामग्री:
- महिंद्रा स्कॉर्पियो
- मोबाइल फोन
- बैंक दस्तावेज
- लेन-देन रिकॉर्ड
- फर्म से जुड़े कागजात
- डिजिटल एविडेंस
यह कार्रवाई दर्शाती है कि आधुनिक पुलिसिंग में डेटा आधारित जांच कितनी महत्वपूर्ण हो चुकी है।
संगठित ठगी का बढ़ता खतरा और समाज पर प्रभाव
भारत के बड़े शहरों में इस तरह के वित्तीय अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। Subhash Place Fraud Case इस बात का उदाहरण है कि अपराधी अब अधिक परिष्कृत तरीके अपना रहे हैं।
अपराध के पीछे उद्देश्य:
- अवैध आर्थिक लाभ
- बैंकिंग सिस्टम का दुरुपयोग
- पहचान छिपाकर नेटवर्क विस्तार
समाज पर असर:
- लोगों का वित्तीय भरोसा कमजोर होता है
- शिक्षा और संपत्ति जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में डर बढ़ता है
- मध्यम वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होता है
विशेषज्ञों के अनुसार नागरिकों को सावधान रहना चाहिए:
✅ बिना सत्यापन पैसा ट्रांसफर न करें
✅ एडमिशन या प्रॉपर्टी डील में आधिकारिक चैनल अपनाएं
✅ संदिग्ध ऑफर से बचें
दिल्ली पुलिस ने भी लोगों से अपील की है कि किसी भी धोखाधड़ी की सूचना तुरंत दें।
जांच अभी जारी है और पुलिस अन्य पीड़ितों की पहचान तथा ठगी गई रकम की बरामदगी के प्रयास कर रही है।
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| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| केस | Subhash Place Fraud Case |
| गिरफ्तारी | 2 आरोपी |
| ठगी का तरीका | संपत्ति और एडमिशन का झांसा |
| बरामदगी | कार, मोबाइल, बैंक दस्तावेज |
| कानून | BNS की कई धाराएं |
| जांच | जारी |
IPS OFFICER
भीष्म सिंह आईपीएस