Digital Arrest Cyber Fraud Delhi Police IFSO International Syndicate Cambodia Nepal ₹14.84 Crore Scam मामले में दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। IFSO यूनिट ने अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ कर 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने बुजुर्ग महिला से करोड़ों रुपये की ठगी की थी। आरोपी CBI और पुलिस अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाते थे और RBI वेरिफिकेशन अकाउंट के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाते थे। जांच में Cambodia और Nepal से जुड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर गैंग का खुलासा हुआ है। जानिए पूरा ऑपरेशन, गिरफ्तारी, मॉडस ऑपरेंडी और पुलिस की चेतावनी।

Digital Arrest Cyber Fraud Delhi Police IFSO International Syndicate Cambodia Nepal ₹14.84 Crore Scam: अंतरराष्ट्रीय साइबर गैंग का पर्दाफाश
नई दिल्ली:
दिल्ली पुलिस की Intelligence Fusion & Strategic Operations (IFSO) यूनिट ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय Digital Arrest साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। इस ऑपरेशन में गुजरात, उत्तर प्रदेश और ओडिशा से कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो Cambodia और Nepal से संचालित साइबर अपराध नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे।
यह मामला इसलिए अत्यंत गंभीर है क्योंकि आरोपियों ने एक 77 वर्षीय बुजुर्ग महिला को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर लगभग ₹14.84 करोड़ की ठगी की। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह अत्याधुनिक डिजिटल टूल्स, फर्जी सरकारी पहचान, नकली कोर्ट सुनवाई और म्यूल बैंक अकाउंट्स के जरिए संगठित रूप से ठगी कर रहा था।
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Digital Arrest Cyber Fraud भारत में तेजी से उभरता हुआ साइबर अपराध है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI, कस्टम्स या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर उनसे पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। यह केस इस अपराध की अंतरराष्ट्रीय और संगठित प्रकृति को उजागर करता है।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस तरह के साइबर अपराधों में आम नागरिकों को मानसिक रूप से डराकर उनकी पूरी जीवनभर की जमा पूंजी लूट ली जाती है। इस मामले में भी पीड़िता और उनके पति को मानसिक दबाव और डिजिटल निगरानी में रखकर करोड़ों रुपये की ठगी की गई।
Digital Arrest Cyber Fraud Delhi Police IFSO International Syndicate Cambodia Nepal ₹14.84 Crore Scam: कैसे हुई करोड़ों की ठगी
यह पूरा मामला 24 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ, जब पीड़िता को एक अनजान मोबाइल नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने दावा किया कि उनके नाम पर रजिस्टर्ड SIM कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस में इस्तेमाल हुआ है और उनके खिलाफ कई FIR दर्ज हैं।
इसके बाद पीड़िता को WhatsApp वीडियो कॉल पर ले जाया गया, जहां नकली CBI और पुलिस अधिकारी बनकर अपराधियों ने फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाया। अपराधियों ने पीड़िता और उनके पति को लगातार वीडियो कॉल पर रखा और धमकी दी कि यदि उन्होंने किसी को बताया तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा।
अपराधियों ने पीड़िता को बताया कि जांच से बचने के लिए उन्हें अपनी पूरी बचत राशि, Fixed Deposit और शेयर निवेश से पैसे निकालकर “RBI Mandated Account” में ट्रांसफर करने होंगे। अपराधियों ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद पूरा पैसा वापस कर दिया जाएगा।
डर और भ्रम के कारण पीड़िता ने 8 ट्रांजेक्शन में कुल ₹14,84,26,954 रुपये ट्रांसफर कर दिए। अपराधियों ने उन्हें घर से बाहर निकलने और किसी से संपर्क करने से भी मना किया, जिससे यह मामला डिजिटल बंधक जैसी स्थिति बन गया।
ऑपरेशन और गिरफ्तारी: Delhi Police IFSO की हाई-टेक जांच और रेड
10 जनवरी 2026 को इस मामले में e-FIR दर्ज की गई और Special Cell की IFSO यूनिट ने जांच शुरू की। SI राज किरण और SI अतुल यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई, जिसने डिजिटल फुटप्रिंट्स, बैंक अकाउंट ट्रेल और तकनीकी सर्विलांस के जरिए पूरे नेटवर्क को ट्रैक किया।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी म्यूल बैंक अकाउंट्स के जरिए पैसे को कई खातों में घुमाकर अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट तक पहुंचाते थे। पुलिस ने Gujarat, Uttar Pradesh और Odisha में एक साथ छापेमारी कर मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में Patel Divyang, Shitole Krutik, Arun Kumar Tiwari, Mahavir Sharma, Pradyuman Tiwari, Ankit Mishra, Bhupendra Mishra और Aadesh Kumar Singh शामिल हैं। इनमें से कुछ आरोपी NGO, फाइनेंशियल फर्म और निजी नौकरियों से जुड़े थे, जिससे नेटवर्क को वैध दिखाने की कोशिश की जाती थी।
पुलिस ने आरोपियों से मोबाइल फोन, चेकबुक और डिजिटल सबूत बरामद किए हैं।

मॉडस ऑपरेंडी: Digital Arrest Cyber Fraud कैसे काम करता है
इस सिंडिकेट का तरीका बेहद संगठित और मनोवैज्ञानिक दबाव पर आधारित था। अपराधी खुद को पुलिस, CBI, कस्टम्स और सरकारी अधिकारी बताकर पीड़ितों को कॉल करते थे और बताते थे कि उनके खिलाफ गंभीर अपराध दर्ज हैं।
पहले चरण में वे धमकी देते थे, फिर सहानुभूति दिखाकर कहते थे कि यह गलतफहमी हो सकती है और जांच के लिए पैसे ट्रांसफर करने होंगे। इसके बाद वे नकली कोर्ट सुनवाई, फर्जी CBI ऑफिस सेटअप और वकील की भूमिका निभाकर पीड़ितों को मानसिक रूप से कमजोर करते थे।
यह पूरी प्रक्रिया पीड़ितों को डर और भ्रम में डाल देती थी, जिससे वे बिना सवाल किए पैसे ट्रांसफर कर देते थे।
पुलिस की चेतावनी, अंतरराष्ट्रीय लिंक और आगे की जांच
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि यह अपराध संगठित, अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर का है। पुलिस अब पूरे मनी ट्रेल, अन्य सहयोगियों और विदेशी हैंडलर्स की भूमिका की जांच कर रही है।
Police अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी Digital Arrest कॉल से सावधान रहें और किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा पैसे ट्रांसफर की मांग पर तुरंत पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करें।
✅ 5 STRONG FAQ
❓ Digital Arrest Cyber Fraud Delhi Police IFSO International Syndicate क्या है?
यह साइबर ठगी का तरीका है जिसमें अपराधी सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं और पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।
❓ इस केस में कितनी रकम की ठगी हुई?
इस केस में ₹14.84 करोड़ की साइबर ठगी हुई।
❓ कितने आरोपी गिरफ्तार हुए?
Delhi Police IFSO ने 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
❓ इस सिंडिकेट का नेटवर्क कहां तक फैला था?
जांच में Cambodia और Nepal से जुड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का खुलासा हुआ है।
❓ Digital Arrest Cyber Fraud से कैसे बचें?
किसी भी सरकारी अधिकारी द्वारा पैसे ट्रांसफर की मांग पर तुरंत पुलिस या साइबर सेल को सूचना दें।
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