DELHI ALERT: नरेला हथियार गिरोह का भंडाफोड़। पुलिस ने पिकेट चेकिंग के दौरान 3 बदमाशों को 2 पिस्टल, चाकू और चोरी की स्कूटी के साथ गिरफ्तार किया।

DELHI ALERT: पुलिस की मुस्तैदी ने नाकाम किए खतरनाक मंसूबे
दिल्ली के आउटर-नॉर्थ जिले में पुलिस की सतर्कता ने एक बड़ी आपराधिक वारदात को होने से पहले ही रोक दिया। नरेला इंडस्ट्रियल एरिया (NIA) थाना पुलिस ने एक रूटीन पिकेट चेकिंग के दौरान चोरी की स्कूटी पर सवार तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इनकी तलाशी लेने पर पुलिस के होश उड़ गए, क्योंकि उनके पास से दो अत्याधुनिक पिस्टल, चार जिंदा कारतूस और एक बटन वाला चाकू बरामद हुआ है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में दो 20 वर्षीय युवक और एक 16 वर्षीय किशोर शामिल है। यह गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस के उस दावे को पुख्ता करती है, जिसमें वे कहते हैं कि सड़कों पर उनकी मौजूदगी और सतर्कता अपराध को रोकने में सबसे कारगर हथियार है।
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घटना का विवरण: एक सामान्य रात और पुलिस की पैनी नजर
यह घटना 29 अक्टूबर 2025 की है, जब दिल्ली पुलिस के जवान अपनी नियमित ड्यूटी पर तैनात थे। आउटर-नॉर्थ जिले में अपराध की रोकथाम के लिए, नरेला के G-7/G-8 पॉकेट के पास एक पुलिस पिकेट लगाया गया था। इस पिकेट पर ASI शंकर, हेड कांस्टेबल राजबीर और कांस्टेबल विक्रम तैनात थे।
रात में जब ट्रैफिक कम था, तब भी ये जवान हर आने-जाने वाले वाहन पर पैनी नजर रखे हुए थे। इसी दौरान, बवाना की जेजे कॉलोनी की तरफ से एक TVS N-torq स्कूटी (रजिस्ट्रेशन नंबर DL 11 PG 7727) पर सवार तीन युवक आते हुए दिखाई दिए। उनकी तेज रफ्तार और हाव-भाव ने पुलिस टीम को सतर्क कर दिया।

चोरी की स्कूटी ने खोला अपराध का पहला पन्ना
पिकेट पर तैनात ASI शंकर ने टीम के साथ स्कूटी को रुकने का इशारा किया। जब पुलिस ने युवकों से स्कूटी के कागजात मांगे, तो वे बहाने बनाने लगे। संदेह होने पर, पुलिस ने वाहन रजिस्ट्रेशन ऐप और अपने डेटाबेस के जरिए स्कूटी के नंबर की जांच की। जांच में जो सामने आया, उससे पुलिस का शक यकीन में बदल गया।
यह स्कूटी दिल्ली के पुल प्रह्लादपुर थाना क्षेत्र से चोरी की गई थी, जिसकी e-FIR (संख्या 018500/25) 6 जुलाई, 2025 को दर्ज हुई थी। चोरी की स्कूटी मिलते ही पुलिस ने तीनों युवकों को तुरंत हिरासत में ले लिया और आगे की पूछताछ के लिए तैयारी शुरू कर दी।
कौन हैं ये 3 संदिग्ध? बवाना की जेजे कॉलोनी से कनेक्शन
पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद तीनों ने अपनी पहचान बताई, जिससे पता चला कि वे सभी बवाना की जेजे कॉलोनी के ही रहने वाले हैं।
- मोहम्मद इरफान (20 वर्ष): पुत्र मोहम्मद निसार, निवासी A-1191, जेजे कॉलोनी, बवाना।
- मोहम्मद अकरम (20 वर्ष): पुत्र मोहम्मद कलाम, निवासी B-978, जेजे कॉलोनी, बवाना।
- CCL “S” (लगभग 16 वर्ष): एक किशोर, जो जेजे कॉलोनी, बवाना का ही रहने वाला है।
तीनों का एक ही इलाके से होना इस बात की ओर इशारा करता है कि यह एक स्थानीय गिरोह है जो इलाके में सक्रिय है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अपराध की दुनिया में 16-20 साल के युवा तेजी से शामिल हो रहे हैं।

तलाशी में मिला हथियारों का जखीरा
चोरी की स्कूटी मिलने के बाद, जब पुलिस ने तीनों आरोपियों की तलाशी ली, तो वे हैरान रह गए। यह कोई मामूली चोरी का मामला नहीं था।
- मोहम्मद इरफान की तलाशी में एक .32 बोर की অত্যাধুনিক पिस्टल और दो जिंदा कारतूस बरामद हुए।
- मोहम्मद अकरम के कब्जे से भी एक .32 बोर की पिस्टल और दो जिंदा कारतूस मिले।
- 16 वर्षीय किशोर (CCL “S”) की जेब से एक बटन वाला चाकू बरामद किया गया।
दो लोडेड पिस्टल, एक खतरनाक चाकू और चोरी की स्कूटी का मिलना यह साफ तौर पर इंगित करता है कि ये तीनों किसी बड़ी और हिंसक वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे।
क्या थी इन बदमाशों की मंशा? पुलिस ने नाकाम किया बड़ा प्लान
पुलिस का अनुमान है कि ये तीनों बदमाश लूट, डकैती या किसी पर जानलेवा हमला करने के इरादे से निकले थे। रात का समय, चोरी का वाहन और अत्याधुनिक हथियार, यह सब किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा था। यह भी संभव है कि वे किसी के साथ बदला लेने या किसी गैंगवार को अंजाम देने जा रहे हों।
हालांकि, पुलिस की एक रूटीन चेकिंग ने उनके खतरनाक मंसूबों पर पानी फेर दिया। अगर यह पिकेट वहां न होता या पुलिस ने थोड़ी भी ढिलाई बरती होती, तो दिल्ली की सड़कों पर कोई बड़ी आपराधिक घटना घट सकती थी।
कानून का शिकंजा: आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज
अवैध हथियारों की बरामदगी के बाद, पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ नरेला इंडस्ट्रियल एरिया थाने में FIR संख्या 854/25 दर्ज की है। यह मामला आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत दर्ज किया गया है। भारतीय शस्त्र अधिनियम (Arms Act) के तहत, बिना लाइसेंस के अवैध हथियार रखना, ले जाना या इस्तेमाल करना एक गंभीर अपराध है, जिसमें कई वर्षों की कैद हो सकती है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन युवकों को ये हथियार कहां से मिले और इनका मुख्य सप्लायर कौन है।

जेजे कॉलोनी, बवाना: अपराध का नया गढ़?
यह हाल के दिनों में दूसरा बड़ा मामला है जिसमें बवाना की जेजे कॉलोनी के निवासियों का नाम सामने आया है। कुछ दिन पहले ही, इसी इलाके से एक स्नैचर गैंग को 12 मोबाइल फोन के साथ गिरफ्तार किया गया था। बार-बार इस इलाके के युवाओं का गंभीर अपराधों में शामिल होना एक बड़ी सामाजिक चिंता का विषय बन गया है।
गरीबी, बेरोजगारी और जल्दी पैसा कमाने का लालच युवाओं को अपराध के दलदल में धकेल रहा है। पुलिस और सामाजिक संस्थाओं को इस क्षेत्र में विशेष ध्यान देने की जरूरत है ताकि युवाओं को सही रास्ते पर लाया जा सके।
ऑपरेशन अंकुश’ और दिल्ली पुलिस की रणनीति
यह सफलता दिल्ली पुलिस, विशेषकर आउटर-नॉर्थ जिले के ‘ऑपरेशन अंकुश’ का हिस्सा है, जिसका नेतृत्व DCP हरेश्वर स्वामी कर रहे हैं। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य स्ट्रीट क्राइम, जैसे झपटमारी, लूट और अवैध हथियारों के प्रसार पर रोक लगाना है।
इसके लिए पुलिस ने गश्त बढ़ाने, जगह-जगह पिकेट लगाकर औचक निरीक्षण करने और अपने खुफिया तंत्र को मजबूत करने की रणनीति अपनाई है। ASI शंकर, HC राजबीर और Ct. विक्रम जैसे सतर्क पुलिसकर्मियों की मेहनत इस रणनीति की सफलता का प्रमाण है।
एक सतर्कता, एक बचा हुआ शहर
अंत में, यह मामला सिर्फ तीन अपराधियों की गिरफ्तारी की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सतर्कता की कहानी है जो शहर को सुरक्षित रखती है। यह हमें याद दिलाता है कि पुलिस की उपस्थिति और उनकी दिन-रात की मेहनत ही आम नागरिकों को सुरक्षा का एहसास कराती है।
इस सफल ऑपरेशन ने न केवल एक संभावित बड़ी वारदात को टाला है, बल्कि इलाके के अन्य अपराधियों को भी एक कड़ा संदेश दिया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे हैं और वे इससे बच नहीं सकते। पुलिस अब इस मामले की आगे की जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।