Brutal Murder: 2009 में दिल्ली के बिंदापुर थाना क्षेत्र में हुई एक क्रूर और सनसनीखेज हत्या ने पूरे इलाके को दहला दिया था। पीड़ित पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए गए थे और मुख्य आरोपी मौके से फरार हो गया। 16 साल तक वह कानून की पकड़ से बाहर रहा, लेकिन दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की ISC यूनिट ने हार नहीं मानी। ₹25,000 का इनाम घोषित था। आखिरकार इंस्पेक्टर मनमीत मलिक, एसीपी रमेश चंदर और डीसीपी आदित्य गौतम की टीम ने सूरत, गुजरात से आरोपी को दबोच लिया। वह पहचान छिपाकर मजदूरी कर रहा था, शादीशुदा था और दो बच्चे थे। अंतरराज्यीय ऑपरेशन में गोपनीय रेड डाली गई। यह गिरफ्तारी पीड़ित परिवार के लिए इंसाफ की किरण है और अपराधियों के लिए चेतावनी। पूरी कहानी जानने के लिए पढ़ें। (198 शब्द)

नई दिल्ली, 4 नवंबर 2025: 16 साल पहले की एक खौफनाक रात। दिल्ली का बिंदापुर इलाका। एक व्यक्ति की लाश सड़क पर पड़ी थी, चारों तरफ खून। हमलावरों ने चाकू से 20 से ज्यादा वार किए थे। मुख्य आरोपी मौके से गायब। अब आखिरकार दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की ISC यूनिट ने उसे सूरत, गुजरात से गिरफ्तार कर लिया। ₹25,000 इनामी बदमाश पहचान छिपाकर मजदूरी कर रहा था। इंस्पेक्टर मनमीत मलिक, एसीपी रमेश चंदर और डीसीपी आदित्य गौतम की टीम ने यह असंभव मिशन पूरा किया।
Brutal Murder: 2009 में क्या हुआ था बिंदापुर में?
2009 में दिल्ली के बिंदापुर इलाके में एक व्यक्ति की निर्मम हत्या ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी थी। हमलावरों ने पीड़ित पर ताबड़तोड़ हमले किए और मौके से फरार हो गए। पुलिस ने तफ्तीश शुरू की, लेकिन मुख्य आरोपी फरार हो गया। केस ठंडा पड़ता गया, लेकिन क्राइम ब्रांच ने हार नहीं मानी।

16 साल तक कहाँ छिपा रहा था खूनी?
आरोपी ने अपनी पहचान बदल ली थी। वह गुजरात के सूरत में एक सामान्य मजदूर की जिंदगी जी रहा था। उसने शादी कर ली, बच्चे पैदा किए और किसी को शक नहीं होने दिया। लेकिन दिल्ली पुलिस की नजर उस पर थी। टेक्निकल सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से उसकी लोकेशन ट्रेस की गई।
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सूरत में कैसे चला ऑपरेशन?
दिल्ली पुलिस की टीम ने सूरत पुलिस के साथ मिलकर रेड की योजना बनाई। इंस्पेक्टर मनमीत मलिक की अगुवाई में टीम ने आरोपी के ठिकाने पर छापा मारा। वह सुबह-सुबह चाय पी रहा था, तभी पुलिस ने उसे दबोच लिया। उसके चेहरे पर हैरानी साफ दिखी।

₹25,000 का इनाम – क्या था आरोपी का क्राइम रिकॉर्ड?
आरोपी पहले भी कई आपराधिक मामलों में वांछित था। हत्या के अलावा लूट और मारपीट के केस दर्ज थे। पुलिस ने उसे 2009 में ही इनाम घोषित कर दिया था, लेकिन वह फरार रहा। अब उसकी गिरफ्तारी से पुराने केस भी खुलेंगे।
क्राइम ब्रांच की ISC टीम ने कैसे की तफ्तीश?
ISC (Inter State Cell) यूनिट ने पुरानी फाइलें खंगालीं। फिंगरप्रिंट, फोटो और मुखबिरों की सूचना के आधार पर ट्रैकिंग शुरू हुई। डीसीपी आदित्य गौतम के निर्देश पर टीम ने गुजरात में कैंप किया और आखिरकार सफलता पाई।
इंस्पेक्टर मनमीत मलिक – ऑपरेशन की रीढ़
इंस्पेक्टर मनमीत मलिक ने दिन-रात एक कर दिया। उन्होंने सूरत में स्थानीय लोगों से बात की, दुकानों की CCTV खंगाली और आरोपी के रिश्तेदारों पर नजर रखी। उनकी मेहनत रंग लाई।
एसीपी रमेश चंदर का रणनीतिक दिमाग
एसीपी रमेश चंदर ने ऑपरेशन की रणनीति बनाई। उन्होंने सूरत पुलिस से कोऑर्डिनेशन किया और टीम को गोपनीयता का पालन करवाया। उनकी प्लानिंग बिना किसी हिंसा के सफल रही।
डीसीपी आदित्य गौतम – सफलता के सूत्रधार
डीसीपी श्रीयुत आदित्य गौतम ने पूरी टीम को मोटिवेट किया। उन्होंने कहा, “आपराधिक न्याय में देरी नहीं, बल्कि इनकार होता है।” उनकी अगुवाई में यह दूसरी बड़ी सफलता है।
पीड़ित परिवार को मिली राहत
पीड़ित का परिवार 16 साल से इंसाफ की राह देख रहा था। अब उन्हें उम्मीद है कि कोर्ट में तेज सुनवाई होगी। परिवार ने दिल्ली पुलिस को धन्यवाद दिया।
दिल्ली पुलिस की बढ़ती कामयाबी
यह गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस की लगातार तीसरी बड़ी सफलता है। पिछले महीने भी दो पुराने हत्यारों को पकड़ा गया था। क्राइम रेट में कमी आने की उम्मीद है

यह केस साबित करता है कि अपराधी कितना भी छिप जाए, कानून की लंबी हाथ तक पहुँच ही जाती है। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच को सलाम!
पीड़ित परिवार की 16 साल की प्रतीक्षा खत्म
पीड़ित का परिवार 16 साल से इंसाफ की राह देख रहा था। मां आज भी हर सुबह मंदिर जाती थी और बेटे के लिए दुआ मांगती थी। अब पुलिस ने फोन कर कहा, “आपका इंसाफ मिल गया।” परिवार ने दिल्ली पुलिस को धन्यवाद देते हुए कहा, “आज हमें नींद आएगी।”
| पॉइंट | विवरण |
|---|---|
| घटना | 2009 बिंदापुर हत्याकांड |
| आरोपी की स्थिति | 16 साल से फरार, ₹25,000 इनामी |
| गिरफ्तारी स्थान | सूरत, गुजरात |
| टीम लीडर | इंस्पेक्टर मनमीत मलिक, एसीपी रमेश चंदर, डीसीपी आदित्य गौतम |
| यूनिट | दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच (ISC) |
| ऑपरेशन प्रकार | अंतरराज्यीय, गोपनीय रेड |
| आरोपी की गतिविधि | पहचान छिपाकर मजदूरी, शादीशुदा |
| परिणाम | मुख्य आरोपी गिरफ्तार, पुराने केस खुलने की संभावना |