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Cyber Cell Vehicle Loan Fraud Case 2026 शानदार कार्रवाई ने वाहन लोन ठगी गैंग का भंडाफोड़

Cyber Cell Vehicle Loan Fraud Case 2026 शानदार कार्रवाई ने वाहन लोन ठगी गैंग का भंडाफोड़

Cyber Cell Vehicle Loan Fraud Case 2026 में दिल्ली पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों से वाहन लोन ठगी करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया।

Cyber Cell Vehicle Loan Fraud Case 2026 शानदार कार्रवाई ने वाहन लोन ठगी गैंग का भंडाफोड़

Cyber Cell की बड़ी सफलता: संगठित वाहन लोन फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश

दिल्ली में साइबर अपराधों और बैंकिंग फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही Delhi Police Crime Branch को 11 जनवरी 2026 को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी। क्राइम ब्रांच की Cyber Cell ने एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और नकली आयकर रिटर्न (ITR) के जरिए बैंकों से वाहन लोन लेकर करोड़ों की ठगी कर रहा था 64802_11 01 2026 CRIME CYBER CE…।

इस मामले में पुलिस ने गिरोह के तीन मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर आरोप है कि वे योजनाबद्ध तरीके से पहले वाहन लोन लेते थे, फिर जानबूझकर उसकी किस्तें नहीं चुकाते थे और बाद में उन वाहनों को बेचकर फरार हो जाते थे। यह पूरा नेटवर्क एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट की तरह काम कर रहा था।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी वाहन खरीदने के बाद उन्हें अलग-अलग राज्यों में दोबारा रजिस्टर करवा देते थे, ताकि बैंक और एजेंसियां उन्हें ट्रैक न कर सकें। इस केस ने यह साफ कर दिया है कि आज के दौर में साइबर अपराध केवल ऑनलाइन ठगी तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

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जांच की शुरुआत और पुलिस ऑपरेशन की पूरी कहानी

इस हाई-प्रोफाइल केस की शुरुआत 25 दिसंबर 2025 को हुई, जब Cyber Cell को एक संगठित गिरोह के बारे में पुख्ता सूचना मिली। इसके बाद एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसका नेतृत्व इंस्पेक्टर संदीप सिंह ने किया। टीम में इंस्पेक्टर विनय कुमार, एएसआई संदीप त्यागी, हेड कॉन्स्टेबल अक्षय, विकास और भूपेंद्र शामिल थे। पूरी कार्रवाई की निगरानी एसीपी अनिल शर्मा द्वारा की जा रही थी 64802_11 01 2026 CRIME CYBER CE…।

टीम ने लगातार तकनीकी निगरानी, फील्ड वर्क और बैंकिंग रिकॉर्ड्स का विश्लेषण किया। जांच में पता चला कि आरोपी लोन मिलने के तुरंत बाद किस्तें जानबूझकर नहीं भरते थे। कुछ ही समय में वे वाहन को किसी दूसरे व्यक्ति को बेच देते थे और बैंक के लिए वह लोन NPA (Non-Performing Asset) बन जाता था।

पुलिस ने जब आधार और पैन कार्ड का विश्लेषण किया तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया—अलग-अलग नामों पर बने दस्तावेजों में फोटो एक ही व्यक्ति की थी। इससे साफ हो गया कि आरोपी फर्जी पहचान (Impersonation) के जरिए बैंकिंग सिस्टम को चकमा दे रहे थे।

मुख्य आरोपी अमन कुमार: एक शख्स, कई पहचान

इस केस का मुख्य आरोपी अमन कुमार है, जो कई फर्जी नामों से काम कर रहा था—जैसे श्याम सुंदर, राहुल कपूर और अन्य। उसकी उम्र करीब 46 वर्ष है और वह तिलक नगर, दिल्ली का रहने वाला है। उसे 25 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया 64802_11 01 2026 CRIME CYBER CE…।

पूछताछ में अमन ने कबूल किया कि वह नकली आधार कार्ड, पैन कार्ड और फर्जी ITR के जरिए अलग-अलग बैंकों से वाहन लोन लेता था। लोन मिलने के बाद वह वाहन खरीदता और फिर उन्हें बाजार में बेच देता। बाद में वह जानबूझकर किस्तें नहीं भरता, जिससे बैंक को भारी नुकसान होता था।

पुलिस ने अमन के पास से कई फर्जी दस्तावेज और वाहन से जुड़े रिकॉर्ड बरामद किए। उसके खिलाफ BNS की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि अमन इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड था।

सह-आरोपी और फर्जी आधार कार्ड नेटवर्क का खुलासा

मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया। इसके बाद धीरज नामक आरोपी को 8 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया। वह भी अलग-अलग नामों—आलोक और सिद्धार्थ—से फर्जी पहचान बनाकर बैंक खाते खुलवाता था और वाहन लोन लेता था 64802_11 01 2026 CRIME CYBER CE…।

जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ—फर्जी आधार कार्ड बनाने का एक पूरा नेटवर्क। इस कड़ी में नरेश कुमार, निवासी नजफगढ़, को 9 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से:

  • मोबाइल फोन
  • आई-स्कैनर
  • बायोमेट्रिक स्कैनर
  • वेब कैमरा
  • PVC कार्ड मशीन

बरामद की गई। इससे यह साफ हो गया कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने का पूरा सेट-अप चल रहा था।

बरामद वाहन, कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच

इस केस में पुलिस ने कुल 5 महंगे वाहन बरामद किए हैं, जिनमें:

  • मर्सिडीज-बेंज
  • मारुति ब्रेज़ा
  • टाटा अल्ट्रोज
  • स्कॉर्पियो-N
  • टोयोटा हिलक्स

शामिल हैं 64802_11 01 2026 CRIME CYBER CE…। यह बरामदगी इस बात का सबूत है कि आरोपी कितने बड़े पैमाने पर ठगी कर रहे थे।

फिलहाल पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ BNS की कई धाराओं में केस दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है। यह पता लगाया जा रहा है कि:

  • कितने बैंकों को नुकसान हुआ
  • कितने वाहन पहले ही बेचे जा चुके हैं
  • क्या इस गिरोह से और लोग जुड़े हैं

Cyber Cell Vehicle Loan Fraud Case 2026 दिल्ली पुलिस की एक बड़ी और सफल कार्रवाई है। इस केस ने यह दिखा दिया है कि साइबर अपराध अब केवल ऑनलाइन ठगी तक सीमित नहीं, बल्कि संगठित बैंकिंग फ्रॉड का रूप ले चुका है। पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच से न सिर्फ करोड़ों की ठगी का पर्दाफाश हुआ है, बल्कि आम लोगों और बैंकों को भी एक बड़ा संदेश गया है।

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