Explosive Cyber Fraud Bust: Delhi Police ने बड़ा खुलासा किया है। दिल्ली पुलिस ने राजस्थान से दो साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया और 70 मोबाइल, 10 लैपटॉप, 467 सिम कार्ड और कई ATM कार्ड बरामद किए। ठगी की रकम Fastag और Amazon Gift Cards के जरिए घुमाई जा रही थी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट, modus operandi, आरोपियों की प्रोफाइल और पुलिस जांच की पूरी जानकारी।

Explosive Cyber Fraud Bust: Delhi Police: इंटरस्टेट साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश
दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने एक बड़े इंटरस्टेट साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए राजस्थान के श्रीगंगानगर से दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह Fastag और Amazon Gift Card के जरिए ठगी की रकम को घुमाने का नया और अत्याधुनिक तरीका इस्तेमाल कर रहा था।
West District Cyber Police Station की टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम देते हुए यह साबित कर दिया कि साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस की तकनीकी क्षमता लगातार मजबूत हो रही है। इस मामले में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और सिम कार्ड बरामद हुए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आरोपी एक संगठित साइबर क्राइम सिंडिकेट चला रहे थे।
शिकायत और घटना: APK फाइल से मोबाइल हैक कर की गई ठगी
इस मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई, जिसमें पीड़ित ने बताया कि उसे WhatsApp पर एक e-challan मैसेज मिला था। मैसेज में एक APK फाइल थी, जिसे खोलते ही उसका मोबाइल फोन हैक हो गया। इसके बाद उसके क्रेडिट कार्ड से ₹1 लाख से अधिक की रकम धोखाधड़ी से काट ली गई।
चूंकि रकम ₹1 लाख से अधिक थी, इसलिए शिकायत को ऑटोमैटिक e-FIR में बदल दिया गया और साइबर पुलिस ने जांच शुरू की।
Fastag और Amazon Gift Card के जरिए पैसे की मनी लॉन्ड्रिंग
जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को सीधे ट्रांसफर नहीं किया जाता था। पहले उस पैसे को Fastag पेमेंट में इस्तेमाल किया जाता था, फिर Fastag बैलेंस से Amazon Gift Cards खरीदे जाते थे।
इन गिफ्ट कार्ड्स को बाद में कैश में बदल दिया जाता था, जिससे पैसे का ट्रेस करना बेहद मुश्किल हो जाता था। यह तरीका साइबर अपराधियों द्वारा पैसे को छिपाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
Pool Account और IDFC बैंक कनेक्शन का खुलासा
तकनीकी जांच में पता चला कि आरोपी IDFC बैंक में एक pool account चला रहे थे, जिससे कई Fastag जुड़े हुए थे। सभी ठगी की रकम पहले इस pool account में जाती थी और फिर अलग-अलग Fastag अकाउंट में वितरित की जाती थी।
वाहन मालिकों की जांच और डिजिटल फॉरेंसिक से पता चला कि यह नेटवर्क राजस्थान के घड़साना इलाके से संचालित हो रहा था।
पुलिस ऑपरेशन: रातभर छापेमारी और आरोपियों की गिरफ्तारी
दिल्ली पुलिस की टीम ने श्रीगंगानगर, राजस्थान में छापेमारी की। टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर विकास कुमार ने किया और ACP व वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कार्रवाई की गई।
घड़साना में “Bansari Company” नामक फर्म के तहत एक पूरी साइबर फ्रॉड सेटअप चल रहा था। यहां से दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपी: प्रोफाइल और शिक्षा
आरोपी 1
घन श्याम उर्फ GB Boss उर्फ सोनू (29 वर्ष)
- शिक्षा: B.Sc. और MBA
- पेशा: फर्जी कंपनियों का संचालन
आरोपी 2
नरेश कुमार उर्फ कालू (27 वर्ष)
- शिक्षा: 12वीं पास
- भूमिका: तकनीकी और बैंकिंग संचालन
दोनों आरोपी पढ़े-लिखे थे और तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल अपराध के लिए कर रहे थे।

Modus Operandi: e-Mitra से साइबर अपराध तक
आरोपी शुरुआत में e-Mitra सेवाओं के जरिए बिजली बिल और अन्य भुगतान कर कमीशन कमाते थे। लेकिन कम कमाई के कारण उन्होंने साइबर फ्रॉड की योजना बनाई।
उन्होंने बैंक अकाउंट्स का गलत इस्तेमाल कर ठगी की रकम रिसीव की और Fastag तथा Amazon Gift Card के जरिए उसे घुमाया।
Recovery: 70 मोबाइल, 10 लैपटॉप और 467 SIM कार्ड बरामद
पुलिस ने भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण बरामद किए, जिनमें शामिल हैं:
- 10 लैपटॉप
- 70 मोबाइल फोन
- 37 ATM कार्ड
- 10 बैंक पासबुक
- 467 सिम कार्ड
- 5 Fastag
- 1 POS मशीन
यह रिकवरी दर्शाती है कि यह गिरोह बड़े स्तर पर साइबर ठगी कर रहा था।
NCRP शिकायतें और Organized Cyber Crime नेटवर्क
जांच में सामने आया कि आरोपियों के बैंक अकाउंट्स और मोबाइल नंबरों से देशभर में कई NCRP शिकायतें दर्ज थीं। इससे यह साफ होता है कि यह कोई अकेला अपराध नहीं बल्कि एक संगठित साइबर अपराध नेटवर्क था।
पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।
आगे की जांच और पुलिस का संदेश
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। Fastag और डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए बैंकों और कंपनियों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
DCP West District ने बताया कि इस केस में और गिरफ्तारियां संभव हैं और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| केस का नाम | Fastag Amazon Gift Card Cyber Fraud Case |
| पुलिस जिला | West District, Delhi Police |
| पुलिस स्टेशन | PS Cyber, West District |
| FIR सेक्शन | U/s 318(4) / 3(5) BNS |
| गिरफ्तार आरोपी | 2 |
| आरोपी स्थान | श्रीगंगानगर, राजस्थान |
| ठगी का तरीका | APK फाइल, Fastag, Amazon Gift Card Conversion |
| बरामद सामान | 70 मोबाइल, 10 लैपटॉप, 467 SIM, 37 ATM कार्ड, 10 पासबुक |
| अन्य बरामदगी | 5 Fastag, 1 POS मशीन |
| नेटवर्क | Inter-State Cyber Fraud Syndicate |
| NCRP शिकायतें | कई राज्यों से जुड़ी |
| जांच स्थिति | आगे जांच जारी |
5 Strong FAQs (Cyber Fraud Case)
Q1. Fastag Amazon Gift Card cyber fraud case क्या है?
यह एक साइबर ठगी का मामला है, जिसमें अपराधियों ने ठगी की रकम को पहले Fastag में डाला और फिर Amazon Gift Cards में बदलकर पैसे को ट्रेस होने से बचाया।
Q2. इस साइबर फ्रॉड केस में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए?
दिल्ली पुलिस ने इस इंटरस्टेट साइबर फ्रॉड मामले में राजस्थान से 2 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
Q3. पुलिस ने आरोपियों से क्या-क्या बरामद किया?
पुलिस ने 70 मोबाइल फोन, 10 लैपटॉप, 467 सिम कार्ड, 37 ATM कार्ड, 10 बैंक पासबुक, 5 Fastag और 1 POS मशीन बरामद की है।
Q4. साइबर ठगी कैसे की जा रही थी?
पीड़ित को WhatsApp पर e-challan मैसेज भेजकर APK फाइल खुलवाई जाती थी, जिससे मोबाइल हैक हो जाता था और क्रेडिट कार्ड से पैसे निकाल लिए जाते थे।
Q5. क्या इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं?
हां, पुलिस के अनुसार जांच जारी है और पूरे साइबर क्राइम नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की संभावना है।
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